गोवा और केरल को पीछे छोड़ , ऋषिकेश बना देश के एडवेंचर टूरिज्म का हब !
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने तीर्थ नगरी ऋषिकेश को साहसिक पर्यटन की राजधानी घोषित किया, जो प्रदेश के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है. 
पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड देश और दुनिया में अलग ही पहचान रखता है और अब उत्तराखंड में दिनों दिन बढ़ रही साहसिक पर्यटन की गतिविधियों पर केंद्र सरकार ने भी मोहर लगा दी है. देशभर में साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में किए गए सर्वे में उत्तराखंड ने गोवा और केरल को पछाड़ते हुए पहले पायदान हासिल किया है. भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने तीर्थ नगरी ऋषिकेश को साहसिक पर्यटन की राजधानी घोषित किया, जो प्रदेश के लिए किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है. 
ऋषिकेश में कई सालों से राफ्टिंग होती आ रही है और अब बंजी जम्पिंग, फ्लाईंग फाक्स, रिवर क्रासिंग और पैराग्लाइडिंग गतिविधियां भी शुरू हो चुकी है. पूरे प्रदेश को साहसिक पर्यटन का केन्द्र पर्यटन मंत्रालय ने माना. एडवेंचर प्रेमियों की पसंद के मामले में गोवा दूसरे, जबकि केरल तीसरे स्थान पर रहा. सचिव दिलीप जावलकर ने कहा कि यह प्रदेश के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है और अगामी फरवरी महीने में प्रस्तावित अन्तर्राष्ट्रीय एशिया पैसिफिक ट्रैवल मार्ट पाटा का भी आयोजन किया जाना है, जो ऋषिकेश में 13 से 15 फरवरी के बीच आयोजित किया जाएगा. उसके अलावा योग और ध्यान सीखने के लिए पूरी दुनिया के लोग यहां आते हैंगंगा किनारे योग करने का एक अलग ही मजा होता है।

ऋषिकेश कौडियाला राफ्टिंग जोन में हर साल बड़ी संख्या में देश और विदेश के सैलानी पहुंचते हैं. दरअसल, 1980 के दशक में कुछ राफ्टिंग एक्सपर्ट ने गंगा की लहरों पर राफ्टिंग शुरू की थी. गंगा नदी के रैपिड और जल भराव के कारण धीरे-धीरे ये क्षेत्र पूरे विश्व में प्रसिद्व हो गया.  नदी राफ्टिंग रोटेशन समिति के अध्यक्ष दिनेश भट्ट ने कहा कि डवेंचर कैपिटल का दर्जा हासिल होने के बाद से निश्चित रूप से पर्यटन कारोबार बढ़ेगा, लेकिन सरकार को भी इस ओर ध्यान देना होगा.

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