पलायन और प्राकृतिक संसाधन

दोस्तों मैंने बहुत पहले कहा था कि एक दिन पहाड़ से पलायन करने वाले लोग एक दिन जरूर वापस आएंगे
क्योंकि मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधन खत्म कर दिए
कई कीमती प्रजाति जैसे मधुमखियाँ और तितलियां विलुप्ति के कगार पर हैं जो परांगण के लिए उत्तरदायी थे
जिसका कारण केवल मनुष्य है उसने अपने स्वार्थ के कारण प्रकृति का जीना हराम कर दिया याद रखें पेड़ पौधे और पशु पक्षी प्रकृति का ही अंग है लाखों पेड़ काटे गये लेकिन किसी ने एक भी पेड़ नहीं लगाया स्त्रोत सूखते गए और लोग इंटरनेट और पाश्चात्य दुनिया के पीछे भागते गए , लोगों इतने निर्दयी हो गए जीव हत्या करते गए उसका परिणाम कभी बेमौसम बरसतब, जब जरूरत हो तब नहीं होना , अत्यधिक गर्मी या ठंडी सब वैश्विक ताप का ही परिणाम है

लाखों अरबों टन कार्बन का उत्सर्जन इसी का कारण है
क्योंकि इनपुट ज्यादा है आउटपुट कम , कार्बन उत्सर्जन,ग्रीन हाउस गैस को रोकने वाले जीवनदायी पेड़
तो कटे जा रहे हैं मनुष्य की भोग विलासता के कारण
मनुष्य हमेशा अपनी सोचता है प्रकृति का उसने कभी भला नहीं किया

 दूसरा अधिक गाड़िया लाना भी इसका बहुत बड़ा कारण  
एक गाड़ी में 50 लोग आ सकते हैं लेकिन यहां 50 लोग 50 अलग अलग गाड़ी लाएंगे और प्रदूषण को बढ़ाने और भीड़ करने , भाई पैसा तुमने ही देखा है क्या?

लाखों पेड़ो की बलि , लाखों जीवों की हत्या कि प्रकृति त्राहिमाम् त्राहिमाम कर रही हैं जिससे अभी तो लोग महामारी से घर वापस आ रहे हैं एक दिन ऐसा आएगा 
कि इतनी भयंकर गर्मी पड़ेगी इतना ज्यादा प्रदुषण हो जाएगा कि जीना मुश्किल हो जाएगा 
और जैसा बताया कि संसाधन खत्म हो रहा है सब्जि अनाज नहीं मिलेगा तो लोग भाग कर अपने पहाड़ जरूर वापस आएंगे

अमित रावत की कलम से

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