वर्तमान समय में ठंडे पानी की जगह फ्रीज ने लेली है
लेकिन आप नही जानते कि फ्रीज के पानी के स्वास्थ्य के लिए कई नुकसान हैं तो आपको मिट्टी के घड़े का पानी पीने की आदत दाल देनी चहिये



आईये जानते हैं मिट्टी के घड़े के पानी पीने के लाभ



मिट्टी के घड़े का पानी –
1 – घड़े का पानी है अमृत के समान
आज भी कई घरों में पीने के पानी को रखने के लिए मिट्टी के घड़े का इस्तेमाल किया जाता है. जो लोग घड़े के पानी की अहमियत को समझते हैं वो लोग आज भी उसी का पानी पीते हैं.
दरअसल मिट्टी में कई प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता पाई जाती है. इसलिए मिट्टी के घड़े का पानी हमें स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है.
2 – वात को नियंत्रित रखने में कारगर
गर्मियां आते ही लोग फ्रिज का पानी पीने लगते हैं. बर्फीला पानी पीने से कब्ज और गले की शिकायत हो सकती है. लेकिन मटके का पानी बहुत ज्यादा ठंडा नहीं होता है जिससे वात नियंत्रित रहता है. मटके का पानी गर्मी में शीतलता प्रदान करता है और इस पानी से कब्ज और गले की समस्या नहीं होती है.
3 – पाचन क्रिया को रखता है दुरुस्त
नियमित रुप से घड़े का पानी पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और पाचन क्रिया दुरुस्त होती है. जबकि प्लास्टिक की बोतलों में पानी स्टोर करने से उसमें प्लास्टिक से अशुद्धियां इकट्ठी हो जाती है. घड़े का पानी पीने से शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है.
4 – गले को ठीक रखने में मददगार
फ्रिज का बहुत ज्यादा ठंडा पानी गले और शरीर के अंगों को एकदम से ठंडा कर शरीर को बुरी तरह से प्रभावित करता है. इससे गले की कोशिकाओं का ताप अचानक गिर जाता है जिससे गला खराब हो जाता है. लेकिन घड़े का पानी पीने से गला अच्छा रहता है.
5 – गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद
गर्भवती महिलाओं को फ्रिज में रखे हुए ठंडे पानी को पीने से परहेज रखने की सलाह दी जाती है. उन्हें घड़े या सुराही का पानी पीने की सलाह दी जाती है. घड़े में रखा पानी गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए अच्छा होता है.
इस तरह से मिट्टी के घड़े का पानी फायदेमंद है – गौरतलब है कि मिट्टी में पानी को शुद्ध करने का खास गुण होता है जो पानी में मौजूद विषैले पदार्थों को सोख लेता है. घड़े में पानी सही तापमान पर रहता है जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. इसलिए फ्रिज का पानी पीने के बजाय मिट्टी के घड़े का पानी पीने की आदत डाल लेनी चाहिए.












पर्वतीय अंचल में पाए जाने वाले बहुउपयोगी पौधों में भीमल का नाम सबसे पहले आता है। यह पहाड़ों में खेतों के किनारे पर्याप्त संख्या में मिलता है। स्थानीय लोग भीमल को भीकू, भिमू, भियुल नाम से भी जानते हैं। इस पेड़ के हर हिस्से का उपयोग होता है। भीमल का बॉटनिकल नाम ग्रेवीया अपोजीटीफोलिया है। इसे वंडर ट्री भी कहते हैं। पेड़ की ऊंचाई 9 से 12 मीटर तक होती है।
हिमालयी क्षेत्र में 2000 मीटर की ऊंचाई तक पाए जाने वाले भीमल के पौधों की संख्या कम हो रही है। पहले इन पेड़ों को पशुओं के चारे के लिए ही लगाया जाता था। इसकी सदाबहार पत्तियों हर सीजन में जानवरों का चारा मिलता है। पहाड़ में पशुपालन घटने से लोग भीमल के पेड़ों का महत्व भी भूलने लगे हैं।
आयुर्वेदाचार्यों ने भीमल पर बड़ा शोध किया है। आयुष दर्पण पत्रिका ने बाकायदा भीमल के हर हिस्से की उपयोगिता पर अध्ययन किया और इसकी जानकारी आम लोगों को देने की कोशिश की। आयुर्वेद में एमडी डॉ. नवीन जोशी ने बताया कि भीमल दुधारू जानवरों के लिए सबसे भरोसेमंद चारा है। भीमल की सूखी और बारीक टहनियां चूल्हे की आग जलाने के काम में लाई जाती है। यह चीड़ के छिलके की तरह ज्वलनशील होते हैं। डॉ. जोशी बताते हैं कि भीमल की छाल को उबालकर गोमूत्र के साथ मिलाने से सूजन और दर्द वाली जगह पर सेंकने से तत्काल आराम मिलता है। भीमल की पत्तियां तो चारे के उपयोग में आती हैं, लेकिन उसकी पतली टहनियों से मजबूत रेशा निकलता है। भीमल से तैयार होने वाली रस्सी नमीरोधक होती है। इसकी छाल को कूटकर बालों को धोने वाला प्राकृतिक शैंपू बनाया जाता है। शिकाकाई में तो भीमल का मिश्रण होने लगा है। डॉ. जोशी कहते हैं कि भीमल का पेड़ हर प्रकार से उपयोगी है। अब राज्य सरकार ने इसके संरक्षण और प्रोत्साहन की योजना बनाई है, यदि लोग इस दिशा में काम करें तो यह वास्तव में आजीविका का नया जरिया बन सकता है।
भीमल के पेड़ों की संख्या घटना चिंताजनक

नगर के आसपास पहले बड़ी संख्या में भीमल के पेड़ थे। शहरीकरण के कारण जमीन बिकी और भीमल के पेड़ नष्ट कर दिए गए। अब नगरीय क्षेत्र में भीमल के पेड़ों की संख्या बहुत कम हो गई है। यह गंभीर चिंता का विषय है। अलबत्ता ग्रामीण अंचलों में भीमल के पेड़ मिलते हैं। लोग इनके व्यापक उपयोग की जानकारी नहीं रखते। इसे सिर्फ चारा प्रजाति का पौधा माना जाने लगा है।
जैसे की आप जानते हैं की प्रोटीन शरीर के लिए सबसे आवश्यक तत्व है

आएये जानते है प्रोटीन के बारें में



एक नए शोध के अनुसार यह बात सामने आई है कि शरीर के लिये प्रोटीन सबसे आवश्‍यक तत्‍व है। प्रोटीन त्वचा, रक्त, मांसपेशियों तथा हड्डियों की कोशिकाओं के विकास के लिए आवश्यक होते हैं।



जानिए प्रोटीन के लाभ


मसल्‍स बनाने में मददगार


मसल्‍स बनाने में मददगार प्रोटीन का सबसे बड़ा लाभ है कि यह शरीर में मसल्‍स बनाने में मदद करता है।


वजन घटाए


वजन घटाए प्रोटीन पचाने में अधिक समय लगता है। जिससे ज्‍यादा मात्रा में कैलोरी बर्न होती है। पेट अधिक समय तक भरा रहेगा तो इससे आपको कम खाने और वजन कम करने में सहायता मिलेगी।


हड्डी मजबूत बनें


हड्डी मजबूत बनें प्रोटीन हड्डियों, लिगामेंट्स और दूसरे संयोजी ऊतकों को स्वस्थ रखने के लिए भी जाना जाता है। प्रोटीन की कमी से हड्डियां और ऊतक कमजोर, कड़े और आसानी से टूटने वाले हो जाते हैं।


शरीर की कार्यप्रणाली को दुरुस्त रखे


शरीर की कार्यप्रणाली को दुरुस्त रखे प्रोटीन को डाइट में लेने से शरीर की कार्यप्रणाली दुरुस्‍त होती है। यह एनर्जी प्रदान करता है, इम्‍यून को शक्‍ती देता है तथा शरीर से गंदगी निकालता है। इसे खाने से भूख भी कंट्रोल रहती है।


बालों और त्‍वचा के लिये


बालों और त्‍वचा के लिये यह हमारी त्‍वचा और बालों के लिये भी अच्‍छा होता है। बालों और नाखूनों में केराटिन नामक प्रोटीन होता है। यह बालों को मजबूत, लचीला और चमकदार बनाता है। बालों, त्वचा और नाखूनों को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के लिए प्रोटीन से भरपूर भोजन खाएं।


बच्‍चों की ग्रोथ के लिये


बच्‍चों को भी एक बैलेंस डाइट लेनी चाहिये, जिसमें अच्‍छी मात्रा में विटामिन, प्रोटीन, मिनरल्‍स और एनर्जी के लिये कार्बोहाइड्रेट्स होने चाहिये।


दिमागी सेहत बढ़ाए


दिमागी सेहत बढ़ाए जब डाइट में प्रोटीन युक्‍त आहार बढ़ाए जाते हैं तो ब्रेन काफी एक्‍टिव हो जाता है। आपके ब्रेन की एक्‍टिविटी आपके आहार पर निर्भर रहती है।


शरीर की ताकत बढाए


यह आपको ऊर्जा देता है। इसलिये अपने आहार में अंडे, बींस, दालें, मीट आदि को शामिल करना ना भूलें।



नीचे दिए लिंक से आप प्रोटीन मंगवा सकते हैं 


https://www.lybrate.com/nestle-resource-protein-400g-vanilla/p/pac_nestleresource400gtin



















न्यार नदी गढ़वाल की पवित्र नदी है जो गंगा की सहायक नदी भी है जिसका संगम गंगा से व्यासघाट में होता है 






ज्वाल्पा देवी मंदिर पश्चिमी न्यार के तट पर है और सतपुली भी इसके किनारे है 
बांघाट में पश्चिमी न्यार और पूर्वी न्यार का संगम है वहां से इसका नाम न्यार नदी पड़ जाता है 
यह नदी कई गांवो को जल उब्लब्ध कराती है 

दूधतोली से 94 किमी का सफर तय करती है नदी

नयार नदी और असगाड़ यानी रामगंगा समुद्रतल से 2600 मीटर ऊंचे स्थान राठ-दूधतोली से निकलती है। थोड़ा आगे चलकर इसकी दो पतली धाराएं बंट जाती हैं पूर्वी और पश्चिमी नयार में। दोनों लगभग 94 किलोमीटर का सफर तय करती हैं। सिद्धपीठ ज्वाल्पा देवी पश्चिमी नयार पर स्थित है। पूर्वी और पश्चिमी नयार नदियों का संगम सतपुली के निकट मटकोली में होता है। इस नदी को भागीरथी नदी तंत्र का हिस्सा माना जाता है। केदारखंड पुराण में भी इस नदी का उल्लेख है। व्यासचट्टी प्राचीनकाल में बदरीनाथ यात्रा का एक मुख्य पड़ाव रहा है। यहां से पैदल यात्री बदरीनाथ के दर्शन के लिए जाते थे। कहा जाता है कि कंडवाश्रम से होकर आने वाले पैदल यात्री भी व्यासचट्टी पहुंचते थे और फिर यहां से वे बदरीनाथ धाम जाते थे।



संगम स्थल व्यासघाट भी पूरी तरह उपेक्षित


इतना अहम स्थान होने के बावजूद व्यासघाट पूरी तरह से उपेक्षित है। किसी भी सरकार ने यहां की सुध नहीं ली। चाय की दुकान चला रहे नरेंद्र बिष्ट के अनुसार व्यासघाट में आधा दर्जन परिवार ही रह गये हैं और उनके लिए भी अब गुजारा चलाना मुश्किल है। उनके अनुसार प्राचीनकाल से ही प्रख्यात रहे व्यास चट्टी को धार्मिक पर्यटन से जोड़ा जाना चाहिए था, लेकिन अब कौन इसकी परवाह करता है?









कुछ दिन पहले एक खबर आई थी। पिथौरागढ़ से 13 साल की अंजलि पंत गायब हो गई थी। खबर आई थी कि अंजलि 3 मार्च को पास के जंगल में जानवरों को चराने गई थी। तबसे अंजलि वापस नहीं लौटी तो सोशल मीडिया पर सिस्टम को लेकर सवाल उठने लगे थे। अब अच्छी खबर ये है कि अंजलि वापस आ गई है। समाजसेवी रोशन रतूड़ी ने अपने फेसबुक पेज के माध्यम से खबर दी कि अंजलि का अपहरण किया गया था और उसे पुलिस की लगातार कोशिशों के बाद वो बरेली में सुरक्षित मिली। यहां सबसे बड़ा सवाल जो खड़ा होता है...वो शब्द है ‘अपहरण’? आज अंजलि सकुशल घर लौट आई, लेकिन ऐसी कितनी अंजलि हैं, जिन पर अपहरणकर्ताओं की नज़र है? क्या सच में पहाड़ में बेटियां सुरक्षित नहीं रह गईं हैं ? सवाल इसलिए भी क्योंकि पिथौरागढ़ से अंजलि लापता हुई थी और बरेली में जाकर मिली है।

अगर ये वास्तव में अपहरण था, तो इस बात को ऐसे ही जाने नहीं दिया जा सकता। पहाड़ में बेटियों की सुरक्षा बेहद जरूरी है और इसके लिए पुलिस विभाग को सतर्क रहने की काफी जरूरत है। हम उत्तराखंड पुलिस को बधाई देना चाहते हैं कि आप अंजलि को वापस ले आए लेकिन इसके साथ साथ ये भी जरूरी है कि उस सिंडिकेट का पता लगाया जाए, जो पहाड़ में बेटियों के अपहरण की साजिश रच रहा है। सवाल सुरक्षा का है और बेहद जरूरी भी...इसलिए सावधानी में ही सुरक्षा है।







उत्तराखंड के लोगों ने किसी की मदद के लिए हमेशा दिल खोलकर हाथ बढ़ाए हैं। एक बार फिर से आपकी जरूरत  है। एक पिता को अपनी बेटी की तलाश है, जो जानवरों को चराने के लिए पास के जंगल में गई थी लेकिन तबसे वापस नहीं लौटी। 13 साल की अंजलि पंत पिथौरागढ़ मकी रहने वाली हैं। उनके पिता का नाम विशन पंत है। बताया जा रहा है कि अंजलि 3 मार्च को पास के जंगल में जानवरों को चराने गई थी। तबसे अंजलि वापस नहीं लौटी है। जिस बेटी की हंसी से घर आंगन में खुशियां रहती थीं, आज वो घर सूना पड़ा है। माता-पिता अंजलि की तलाश में दर दर भटक रहे हैं। गांव के सभी लोग परेशान हैं और अंजलि की खोजबीन में लगे हैं। पुलिस को इस बात की खबर दे दी गई है और पुलिस भी अंजलि की तलाश में जुटी है। सभी के दिल में बस ये ही दुआ है कि अंजलि जहां भी हो, सही सलामत हो।


गांव वाले भी लगातार तलाश में जुटे हैं लेकिन कुछ भी पता नहीं लग पा रहा है। सोशल मीडिया पर लगातार मुहिम चल रही है कि अंजलि के परिवार की मदद करें। उधर समाजसेवी रोशन रतूड़ी ने भी कहा है कि अंजलि के परिवार की मदद करें, उन्होंने अंजलि का पता लगाने वाले को ईनाम देने की घोषणा की है। उन्होंने लिखा हबै कि अगर आपको अंजलि का पता चलता है, तो (+971-5040-91-945) पर संपर्क करें। वास्तव में 13 साल की बच्ची को आपकी मदद की दरकार है, उस बेटी के परिवार पर क्या बीत रही होगी, ये उन माता-पिता से बेहतर कोई जानता, जिन्होंने नाजों से अपनी बेटी का पालन-पोषण किया था। थक-हार कर परिवार वालों नें पुलिस में गुमशुदगी होने की रिपोर्ट दर्ज करा दी है । उतराखंड पुलिस भी रात-दिन अपनी तरफ से पूरी तरह से खोजबीन मे लगी है।


उत्तराखंड की इस मासूम बिटीया का पता लगाने के लिए , ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करै, और इंसानियत के लिए इस मासूम बेटी को ढूँढने मैं मदद करें ।
इस मासूम बिटीया का पता बताने वाले को मेरी तरफ से 25,000 रूपये नगद इनाम दिया जायेगा ।
नाम अंजली पतं ,उम्र-13 वर्ष , पिता का नाम-विशन पतं ,जिला-पिथौरागढ उतराखंड, ये मासूम बिटीया अंजली पतं 3 मार्च को जानवरों को चराने के लिए पास के जंगल में गयी थी ,परंतु जंगल से लौटकर घर नहीं आई । अंजलि के माता-पिता बेटी की तलाश मे जगह-जगह भटक रहे हैं, रो-रो कर बुरा हाल है ।गाँव के सभी लोग बहुत परेशान है सभी ने काफ़ी खोजबीन की परंतु, अभी तक अंजली पतं का कोई पता नहीं लग पाया है ।
जब कहीं भी मासूम अंजलि का पता नहीं लगा पाया आखिर मै परिवार वालों नें पुलिस में गुमशुदगी होने की रिपोर्ट दर्ज करा दी है । उतराखंड पुलिस भी रात-दिन अपनी तरफ से पूरी तरह से खोजबीन मे लगी है ।
भगवान करें ये मासूम बेटी जहाँ कहीं भी हो सकुशल हो । जिस किसी सज्जन को इस बिटीया का पता लगे तुरंत मुझे नीचे लिखे इस नंबर पर सम्पर्क करै । ( +971-5040-91-945)
आपका सेवक
रोशन रतूडी ( Social Activist)
RR Humanity-1st Dev Bhoomi Uttrakhand

उत्तराखंड में एक जंगली और कंटीली झाड़ी पर छोटे-छोटे बैंगनी फल लगते हैं, जिन्हें बच्चे बड़े चाव से खाते हैं। किलमोड़ा कहे जाने वाले इस फल को आम तौर पर लोग उपेक्षित ही करते हैं और इस पौधे को अपने खेतों से हटा देते हैं। लेकिन अब इसी उपेक्षित कंटीली झाड़ी से दुनियाभर में जीवन रक्षक दवाएं तैयार हो रही हैं।
जड़ी-बूटी के उत्पादन व संरक्षण में जुटे बागेश्वर के एक ग्रामीण ने किलमोड़ा की झाड़ियों से तेल तैयार किया है। खास बात यह है कि शुद्धता के कारण यह तेल लखनऊ की दवा बनाने वाली एक कंपनी को बेहद पसंद आया है।
वनस्पति विज्ञान में ब्रेवरीज एरिस्टाटा को पहाड़ में किलमोड़ा के नाम से जाना जाता है। इसकी करीब 450 प्रजातियां दुनियाभर में पाई जाती हैं। भारत, नेपाल, भूटान और दक्षिण-पश्चिम चीन सहित अमेरिका में भी इसकी प्रजातियां हैं।
किलमोड़ा का पूरा पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है। इसकी जड़, तना, पत्ती, फूल और फलों से विभिन्न बीमारियों में उपयोग आने वाली दवाएं बनाई जाती हैं। मुख्य रूप से इस पौधे में एंटी डायबिटिक, एंटी ट्यूमर, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी बैक्टीरियल, एंटी वायरल तत्व पाए जाते हैं। मधुमेह (डायबिटीज) के इलाज में इसका सबसे अधिक उपयोग होता है।




उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश-बर्फबारी ने सालों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। प्रदेश के कई इलाकों में मार्च में भी बर्फबारी का दौर जारी है। इस बार चकराता में 20 साल बाद मार्च में बर्फबारी हुई है, पहाड़ों की चोटियां बर्फ से ढकी हैं। खेतों से लेकर रास्तों तक पर बर्फ जमी है। कई जगह रोड ब्लॉक हो गई हैं, जिस वजह से वाहनचालकों को परेशानी हो रही है। यहां के लोग कहते हैं कि मार्च में ऐसी बर्फबारी अब से 20 साल पहले हुई थी, कई सालों बाद यहां के लोगों ने मार्च में बर्फबारी देखी है। यही हाल धनोल्टी का भी है। धनोल्टी में 13 साल बाद मार्च में बर्फबारी हुई। पौड़ी में भी इस साल खूब बर्फबारी हुई  कई इलाके बर्फ से आच्छादित हो गए  वहीँ सतपुली में कई सालों बाद ओले पड़े 



मौसम विभाग की मानें तो फिलहाल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। मसूरी और देहरादून में बारिश और ओले गिरने से तापमान में गिरावट आई है। मौसम विभाग ने कहा है कि उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं हल्की बारिश के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात हो सकता है 





कल्जीखाल ब्लाक के सांगुडा में गुरुवार को 83 साल के किसान विद्यादत्त शर्मा के आवास पर महामूला रिकार्ड मूल्यांकन सम्मेलन और गोष्ठी का आयोजन किया गया।  सम्मेलन में सांगुडा निवासी प्रगतिशील किसान विद्यादत्त शर्मा द्वारा उगाए गए 22 किलो 750 ग्राम के मूले के साथ ही अन्य मूलों को खेतों से निकाला गया। सबसे अधिक वजन के निकले 22 किलो 750 ग्राम मूले को राष्ट्रीय रिकार्ड बताया जा रहा है। लिम्का बुक के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने इस मूले का मूल्यांकन भी किया। इस दौरान आयोजित गोष्ठी में किसान विद्यादत्त शर्मा के द्वारा खेती को लेकर किए जा रहे कार्यों की सराहना की गई। आयोजित गोष्ठी में विधायक पौड़ी मुकेश कोली ने किसान विद्यादत्त शर्मा के कार्यों की सराहना करते हुए युवाओं और महिलाओं से खेती करने पर जोर दिया। उन्होंने पलायन पर भी चिंता जताई। चकबंदी प्रणेता गणेश गरीब ने कहा कि जब तक प्रदेश में चकबंदी नहीं होगी तब तक पलायन पर रोक नहीं लगाए जा सकती है।  

खेती के लिए छोड़ दी थी सरकारी नौकरी
प्रगतिशील किसान विद्यादत्त शर्मा का खेती के प्रति बेहद लगाव है। 83 साल की उम्र में भी विद्यादत्त शर्मा पूरे जोश के साथ खेती करते हैं और युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं। सांगुडा में उन्होंने मोतीबाग नाम से बगीचा बनाया हुआ है। जिस पर मटर, लहसुन, मधुमक्खी पालन, मूला के साथ ही कई तरह की फसले उगाई जाती हैं।  खेती करने के लिए उन्होंने साल 1965 में चकबंदी भू माप विशेषज्ञ के पद से व्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान खेती पर केंद्रित कर लिया जो आज भी जारी है। 83 साल की उम्र में भी खेती के प्रति उन पर बेहद जोश देखा जा सकता है। उन्होंने जिले में भी खेती को लेकर बेहतरीन काम करने पर कई पुरस्कार भी दिए जा चुके है। खेती के साथ-साथ विद्यादत्त शर्मा का साहित्य के प्रति भी बेहद लगाव है।  अभी तक उन्होंने कृषि से लेकर विभिन्न विषयों पर 8 किताबे भी लिखी हैं।

उत्तराखंड में शुक्रवार को मौसम साफ रहने के बाद,शनिवार सुबह से मौसम ने एक बार फिर करवट बदल ली है। शनिवार सुबह से देहरादून सहित कई मैदानी क्षेत्रों में बादल छाय हुए है। कई क्षेत्रों में बारिश भी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में भारी बारिश और ओलावृष्टि के आसार बने हुए है।
बता दें कि प्रदेश में अभी ठंड़ से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। राज्य में ठिठुरन बरकरार है। नई टिहरी और कुमाऊं के मुक्तेश्वर में पारा शून्य के नीचे है, वहीं जोशीमठ और पिथौरागढ़ में तापमान शून्य के आसपास बना हुआ है। पूरे प्रदेश में न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस से कम रहा। मौसम विभाग के अनुसार हालांकि फिलहाल मौसम साफ है, लेकिन सोमवार से को एक बार फिर से पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी के आसार बन रहे हैं। मौसम शनिवार रात से एक बार फिर से करवट बदल सकता है। जिससे बारिश व ओलावृष्टि होने की संभावना बन रही है। दून का न्यूनतम तापमान सामान्य से चार डिग्री नीचे रिकॉर्ड किया गया।





उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। लाखों श्रद्धालुओं को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने का इंतजार है। ये इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है। प्राचीन परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि के पावन मौके पर केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित की जाएगी। ऊखीमठ में पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर में 4 मार्च को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि के बारे में बताया जाएगा। भगवान भोलेनाथ के धाम केदारनगरी के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड आते हैं। यहां श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने वाले की हर मुराद पूरी होती है, यही वजह है कि भगवान शिव का हर भक्त अपने जीवनकाल में एक ना एक बार शिव के धाम के दर्शन करना चाहता है। 






पौड़ी में शुक्रवार को कंडोलिया मैदान में हिलांस कृषि मेले का आयोजन किया गया। एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना पौड़ी के तत्वावधान में आयोजित इस मेले में परियोजना से जुड़े स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न विभागों ने पहाड़ी उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। मेले में गढ़वाली व्यंजन प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। कंडोलिया मैदान में आयोजित हिलांस कृषि मेले में प्रभागीय परियोजना प्रबंधक अशोक चतुर्वेदी ने परियोजना द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। कहा कि इस मेले का उद्देश्य लोकल उत्पादों को बढ़ावा देना, पहाड़ी उत्पादों को अच्छी पैकेजिंग के माध्यम से देश से लेकर विदेश तक पहुंचाना है। मुख्य अतिथि विधायक पौड़ी मुकेश कोली ने समूहों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने पर जोर दिया। कहा कि सरकार किसानों को लेकर कई योजनाएं संचालित कर रही है। मेले में पहचान ग्रुप ने पलायन को लेकर आधारित एक नई सोच नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को पलायन के खतरों की जानकारी दी। मेले में परियोजना से जुड़े बुरांश आजीविका स्वायत सहाकारिता संघ घंडियाल और प्रतिज्ञा आजीविका सहायक सहकारिता न्याय पंचायत पंचाली को सहयोग राशि देकर सम्मानित किया गया। साथ ही कल्जीखाल ब्लाक के सांगुडा निवासी 83 साल के किसान विद्यादत्त शर्मा को भी खेती को लेकर बेहतरीन काम करने पर सम्मानित किया गया। 


उत्तराखंड में हो रहे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2019 जो कि 1 मार्च से 7 मार्च तक योग की राजधानी ऋषिकेश में चलेगा का शुभारंभ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री माननीय त्रिवेंद्र रावत जी एवं सरकार में पर्यटन सिंचाई लघु सिंचाई संस्कृति धार्मिक मेले कैबिनेट मंत्री माननीय श्री सतपाल_महाराज जी व उत्तराखंड विधानसभा के अध्यक्ष माननीय प्रेमचंद अग्रवाल जी की उपस्थिति में हुआ उत्तराखंड योग दिवस का हिस्सा बनने आए प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर जी ने उत्तराखंड की खूबसूरती को निहारा तथा अपने सुमधुर गायन से कार्यक्रम में देश विदेश से योग दिवस में आते प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया कार्यक्रम में देश विदेश से योग दिवस का हिस्सा बनने आए प्रतिभागी व पूर्व कैबिनेट मंत्री अमृता रावत, ऋषिकेश की मेयर अनीता मंगाई सहित शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी जनप्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

खिर्सू में शीघ्र ही आयुर्वेदिक ड्रग फैक्ट्री की स्थापना की जाएगी। इसके लएि भूमि चयन की प्रक्रिया चल रही है। स्थानीय किसानों को जड़ी-बूटी उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। किसानों द्वारा उत्पादित जड़ी बूटियों को सहकारी संघ के माध्यम से क्रय किया जाएगा। जिसका उपयोग ड्रग फैक्ट्री में किया जाएगा।
गुरुवार को श्रीनगर में पत्रकार वार्ता में उत्तराखंड सहकारी संघ के अध्यक्ष बृजभूषण गैरोला ने कहा कि पहाड़ के किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जिसके लिए किसानों को स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए सहकारी संघ स्थानीय स्तर पर विषय विशेषज्ञों द्वारा कार्यशालाओं का आयोजन करेगा। किसानों के स्थानीय उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज का भी निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सहकारी संघ स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिग कर सहकारी समिति के माध्यम से बिक्री करेगा। जिससे किसानों को उनके उत्पादन का उचित दाम भी प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि सहकारी संघ जैविक खाद द्वारा उत्पादित उत्पादों को प्रोत्साहित करेगा। प्रदेश में बंद पड़ी सहकारी समितियों और घाटे में चल रही समितियों को पुनर्जीवित कर महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने का कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने को लेकर प्रदेशभर के विभिन्न स्थानों पर ग्रोथ सेंटरों की स्थापना की जाएगी।

कौन हैं.. और क्या हैं जानें
चाणक्य जैसा दिमाग और बाजीराव जैसा हौंसला। असली जिंदगी के बारे में कुछ ख़ास बातें :
* 1945 में एक गढ़वाली #उत्तराखण् ब्राह्मण परिवार में जन्म। पिता आर्मी में ब्रिगेडियर थे।
* 1968 में IPS का एग्जाम टॉप किया। केरल batch के IPS officer बने।
* 17 साल की duty के बाद ही मिलने वाला medal 6 साल की duty के ही बाद मिला।
* पाकिस्तान में जासूस के तौर पर तैनाती। पाकिस्तान की आर्मी में मार्शल की पोस्ट तक पहुंचे और 6 साल भारत के लिए जासूसी करते रहे।
* 1987 में खालिस्तानी आतंकवाद के समय पाकिस्तानी agent बनकर दरबार साहिब के अंदर पहुंचे। 3 दिन आतंकवादियों के साथ रहे। आतंकवादियों की सारी information लेकर operation black thunder को सफलता पूर्वक अंजाम दिया।
* 1988 में कीर्ति चक्र मिला। देश का एक मात्र non army person जिसे यह award मिला है।
*असम गए। वहां उल्फा आतंकवाद को कुचला।
* 1999 में plane hijacking के समय आतंकवादियों से dealing की
* RSS के करीबी होने के कारण मोदी ने सत्ता में आते ही NSA (National Security Advisor) बनाया
* बलोचिस्तान में raw फिर से active की। बलोचिस्तान का मुद्दा international बनाया।
* केरल की 45 ईसाई नर्सों का iraq में isis ने किडनैप किया। डोभाल खुद इराक गए। isis से पहली बार hostages ज़िंदा बिना बलात्कार हुए (महिला) वापिस लौटे
* राष्ट्रपति अवार्ड मिला।
* 2015 मई में भारत के पहले सर्जिकल operation को अंजाम दिया। भारत की सेना myanmar में 5 किमी तक घुसी । 50 आतंकवादी मारे।
* नागालैंड के आतंकवादियों से भारत की इतिहासिक deal करवाई। आतंकवादी संगठनों ने हथियार डाले।
* भारत की defence policy को agressive बनाया। भारत की सीमा में घुस रहा पाकिस्तानी ship बिना किसी warning के उड़ाया। कहा बिरयानी खिलाने वाला काम नही कर सकता।
* कश्मीर में सेना को खुली छूट दी। pallet gun सेना को दिलवाईं। पाकिस्तान को दुनिया के मुस्लिम देशों से ही तोड़ दिया।
* 2016 september आज़ाद भारत के इतिहास का 1971 के बाद सबसे इतिहासिक दिन। डोभाल के बुने गए surgical operation को सेना ने दिया अंजाम। PoK में 3 किलोमीटर घुसे। 40 आतंकी और 9 पाकिस्तानी फौजी मारे। दोनों surgical strikes में zero casuality
*Right Wing Hindu संगठन vivekanand youth forum की स्थापना की।
एक वो बाजीराव था जो कहा करता था मैं दिल्ली जीत सकता हूँ । एक डोभाल है जो कहते है की मैं इस्लामाबाद जीत सकता हूँ।
हमे आप पर गर्व है।
जय हिंद🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
🚩 वंदेमातरम् 🚩


अभिनंदन एक रिटायर्ड एयर मार्शल के बेटे हैं. जो फिलहाल भारत में साउथ के किसी राज्य में रहते हैं. उन्होंने भारतीय वायुसेना में ईस्टर्न एयर कमांड चीफ के तौर पर काम किया था. अभिनंदन के पिता मणि रत्नम की फिल्म काटरू वेल्यिदाई में एक कंसल्टेंट के तौर पर थे. यह फिल्म कारगिल युद्ध पर बनाई गई थी. इस फिल्म में एक इंडियन पायलट को पाकिस्तान के कब्जे में दिखाया गया है.
भारत रक्षक वेबसाइट के मुताबिक अभिनंदन साल 2004 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए थे. उनका सर्विस नंबर 27981 है. बताया जा रहा है कि विंग कमांडर अभिनंदन के भाई भी एयरफोर्स में हैं.


आज भारत का वीर सपूत और भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन की वतन वापसी होने जा रही है। बताया जा रहा है कि वो इस्लामाबाद से लाहौर के लिए निकल चुके हैं। इसके बाद वो बॉर्डर पर लाए जाएंगे। जहां से दोपहर 3-4 बजे तक अभिनंदन की वतन वापसी हो सकती है। यानि तकरीबन 2 घटों का वक्त बचा है। बताया जा रहा है कि कागज़ी कार्रवाई पूरी कर ली गई है। बताया जा है कि अभिनंदन के स्वागत के बाद उन्हे सीधे दिल्ली स्थित वायुसेना के हेडक्वार्टर पर लाया जाएगा जहां उनका मेडिकल चेकअप होगा।




पाकिस्तान में बंदी बनाए गए विंग कमांडर अभिनंदन आज भारत लौटेंगे। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि उन्हें दोपहर बाद छोड़ा जाएगा। उधर, वाघा बॉर्डर पर उनके स्वागत में लोग ढोल-नगाड़े, पोस्टर और हार-फूल लेकर पहुंचे हैं। अभिनंदन के माता-पिता भी उन्हें लेने वाघा बॉर्डर पहुंच रहे हैं। दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से उतरते वक्त लोगों ने उनका ताली बजाकर स्वागत किया। प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्तान की संसद में गुरुवार को ऐलान किया था कि भारतीय पायलट को शुक्रवार को भारत को सौंपा जाएगा।

इमरान ने कहा कि पाकिस्तान शांति का संदेश देने के लिए यह कदम उठा रहा है। इससे पहले भारत ने पाक से कहा था कि वह तत्काल और बिना शर्त अभिनंदन को रिहा करे। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से कहा कि भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अगर अभिनंदन की रिहाई के बदले पाक सौदेबाजी की उम्मीद कर रहा है तो यह उसकी बड़ी भूल है।


'एक पायलट प्रोजेक्ट पूरा हो गया'
पाकिस्तान की ओर से गुरुवार को अभिनंदन की रिहाई के ऐलान के कुछ ही देर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के विज्ञान भवन में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार समारोह के दौरान स्पीच दे रहे थे। उन्होंने पाक का नाम लिए बगैर उस पर तंज कसा। प्रधानमंत्री ने कहा- "पायलट प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद उसे बढ़ाया जाता है, तो अभी एक पायलट प्रोजेक्ट हुआ है। अब रियल करना है, पहले तो प्रैक्टिस थी।" 

'एक पायलट प्रोजेक्ट पूरा हो गया'
पाकिस्तान की ओर से गुरुवार को अभिनंदन की रिहाई के ऐलान के कुछ ही देर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के विज्ञान भवन में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार समारोह के दौरान स्पीच दे रहे थे। उन्होंने पाक का नाम लिए बगैर उस पर तंज कसा। प्रधानमंत्री ने कहा- "पायलट प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद उसे बढ़ाया जाता है, तो अभी एक पायलट प्रोजेक्ट हुआ है। अब रियल करना है, पहले तो प्रैक्टिस थी।"


पहाड़ों  में कई तरह की जड़ी—बूटिंया पाई जाती हैं। इसके अलावा यहां पर एक एैसा फूल पाया जाता है जो हमें कई बीमारियों से बचा सकता हैं यानि की औषधियुक्त पौधा। उत्तराखंड, हिमाचल और नेपाल विश्व की तीन एक मात्र एैसी जगह हैं जहां बुंरास का आयुर्वेदिक पौधा मिलता है। कई रंगों में पाया जाने वाला ये फूल बहुत से गुणों से भरपूर होता है। इस फूल के जूस से आप कई गंभीर रोगों से बच सकते हो। समुद्र तल से 3500 मीटर उंचे पहाड़ी इलाकों में ये फूल गर्मियों के मौसम में उगता है।
आयुर्वेद में भी जिक्र किया गया है इस फूल का। लाल रंग वाला बुंरास में सबसे अधिक स्वास्थवर्धक गुण पाए जाते हैं। ये फूल केवल विशेष मौसम में ही होता है। उस समय इसकी मांग खूब बढ़ जाती है।

अब आपको बताते हैं बुंरास के फूल का जूस पीने के फायदों के बारे में-

जो लोग खासकर की दिल की बीमारी या फिर किड़नी में होने वाली दिक्कत से ग्रसित हों वे इस जूस का सेवन नियमित करें। इससे इन रोगों से छुटकारा पा लेगें।


खून की कमी

इस फूल के रस में विटामिन ए के अलावा विटामिन बी—1 और बी—2 भी होता है। जो इंसान के शरीर में एनिमया यानी खून की कमी को दूर करता है। ये लाल पहाड़ी फूल वजन को बढ़ने से रोकता है।


हड्डियों का दर्द

उम्र जैसे—जैसे बढ़ती है हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। साथ ही दर्द का होना भी स्वभाविक हो जाता है। ऐसे में यदि आप नियमित होकर बुंरास का जूस पीते हो तो कुछ ही दिनों में आपका ये दर्द ठीक हो जाएगा।


स्किन से जुड़ी समस्याएं

इस फूल से बनने वाला शर्बत को यदि आप नियमित पीते हैं तो इससे आपकी त्वचा साफ होगी। इस जूस में एंटीआॅक्सीडेंट होते हैं जो
दिमाग को भी शां​त रखते हैं।

ब्लड प्रेशर की समस्या

दिनों दिन ये समस्या आम होती जा रही है लेकिन इससे होने वाले नुकसान भी बहुत हानिकारक होते हैं। यदि आपका रक्तचाप यानि ब्लड प्रेशर हमेशा हाई रहता हो तो आप जरूर इस फूल के जूस का सेवन करें। इससे ये समस्या जड़ से ठीक हो जाएगी



शरीर में आयरन की कमी 

वे लोग जिनके शरीर में आयरन तत्व यानी की लौह की मात्रा कम हो गई हो वे बुंरास का जूस या शर्बत जरूर पीएं। इससे शरीर
बीमारियों से लड़ने में भी सक्षम हो जाता है।

चटनी

दोस्तों ये फूल केवल बीमारियों को ठीक नहीं करता इसके अलावा भी आप इसका सेवन चटनी के रूप में भी कर सकते हो। इसके स्वादिष्ट चटनी बनती है जो पोषक तत्वों से भरपूर होती है।



श्री सिद्धबली धाम कोटद्वार में बाबा की चौखट से कोई भी श्रद्धालु निराश नहीं लौटता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है। मनोकामना पूरी होते ही भक्त मंदिर में भंडारा कर हनुमान जी को भोग लगाते हैं। श्रद्धालुओं पर बजरंग बली की नेमत इस कदर बरसती है कि यहां भंडारा आयोजन के लिए भक्तों को सालों साल इंतजार करना पड़ता है। धाम में अगले सात वर्षों यानी 2025 तक भंडारों की एडवांस बुकिंग चल रही है।



कोटद्वार स्थित श्री सिद्धबली धाम हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। बजरंग बली जी के इस पौराणिक मंदिर का जिक्र स्कंद पुराण में भी है। श्री सिद्धबली बाबा के दर्शन को देश एवं विदेश से श्रद्धालु यहां उमड़ते हैं और मंदिर में मत्था टेककर मनोकामना मांगते हैं। बाबा अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते। मुराद पूरी होने के बाद श्रद्धालु मंदिर में भंडारा कर भोग लगाते हैं।
श्री सिद्धबली धाम की ख्याति देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक है। हर साल लाखों भक्त देश एवं विदेश से धाम पहुंचते हैं। भंडारा बुकिंग काउंटर के शैलेश कुमार जोशी बताते हैं कि भंडारे की एडवांस बुकिंग कराने वाले श्रद्धालु उत्तराखंड के अलावा यूपी, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र से हैं। कई एनआरआई भी हैं, जिनकी मुराद धाम में आने पर पूरी हुई है। श्री सिद्धबली धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष कुंज बिहारी देवरानी के मुताबिक श्री सिद्धबली धाम गुरु गोरखनाथ जी की तपस्या स्थली रही है। आदिकाल में मंदिर स्थल पर सिद्ध पिंडियां थीं। 80 के दशक में मंदिर में बाबा की मूर्ति स्थापित हुई। इसके बाद ही मंदिर का सुंदरीकरण हुआ। कहा जाता है कि हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने के लिए इसी रास्ते गए थे।










विकास खंड कल्जीखाल के अंतर्गत बडखोलू मोटर पुल की लागत 17 करोड़ व बोंसाल मोटर पुल की लागत 10 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति मिलने के पश्चात विश्व बैंक की टीम द्वारा सर्वेक्षण का कार्य किया गया। इन दोनों पुलों की निर्माण की क्षेत्रीय जनता की वर्षों पुरानी मांग और चुनाव के समय माननीय विधायक जी द्वारा क्षेत्रीय जनता से इन दोनों पुलों को बनाने का अपने वादे को पूरा करने के लिए माननीय विधायक श्रीमान मुकेश कोली जी का हार्दिक आभार।।

जाने बौंसाल पुल के बारे में 







सतपुली मेरठ-पौड़ी राजमार्ग पर एक शहर है, जो कोटद्वार से लगभग 50 किलोमीटर और पौड़ी से 50 किलोमीटर की दूरी पर, उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित है।
 
सतपुली नयार (पूर्व) नदी के दक्षिणी किनारे पर और नयार (पूर्व) और नायर (पश्चिम) नदियों के संगम से 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह बाणघाट से भी जुड़ा हुआ है, जहां पर एकीकृत नायर नदी गंगा नदी से मिलती है। सतपुली, पौड़ी गढ़वाल जिले के सतपुली शहर के ब्लॉक कार्यालय के साथ है। सतपुली ब्लॉक में 263 गांव शामिल हैं।  यह पौड़ी से 52 किमी और कोटद्वार से 54 किमी दूर है।
 
 
ऐसा कहा जाता है कि सतपुली का नाम इस तथ्य से पड़ा है कि कोटद्वार के रास्ते में इसके सात पुल (साट-पुल) हैं। कुछ दशक पहले तक यह स्थान एक खेत हुआ करता था। धीरे-धीरे, कुछ झोपड़ी जैसी दुकानें नदी के दूसरे किनारे पर फैल गईं। 1951 में सतपुली में बड़े पैमाने पर बाढ़ देखी गई, जिससे जान-माल की हानि हुई और उस साल कई लोगों की मौत हो गई। कुछ दुकानें और नोट-योग्य इमारतें जैसे जी.एम.ओ.यू का कार्यालय। प्रा। लिमिटेड बह गया था। बाद में, दुकानदारों को वर्तमान स्थान पर बसाया गया। नयार नदी के बड़े बाढ़ में मारे गए लोगों की याद में जल विद्युत स्टेशन पर एक स्मारक बनाया गया है। सतपुली अपने माचा भट (मछली की सब्जी और चावल) के लिए प्रसिद्ध है और यात्रियों के लिए एक पड़ाव / विश्राम स्थल के रूप में है जहाँ उनका दोपहर और रात का भोजन कोटद्वार, पौड़ी, श्रीनगर या नैया घाटी के उच्चतर स्थानों तक पहुँचता है। अब यह एक टाउन एरिया है।
 
सतपुली मछली पकड़ने के लिए एक आदर्श स्थान है क्योंकि नयार (पूर्व) और नयार (पश्चिम) दोनों नदियाँ अलग-अलग मछलियों से भरी हुई हैं। इन दोनों नदियों के संगम के बाद मछलियों की विविधता और संख्या और बढ़ जाती है। जलीय जंतुओं की एक भीड़ के अलावा, मीठे पानी की ईल (गढ़वाली के रूप में जानी जाती है), चित्तीदार कैटफ़िश की एक स्थानीय किस्म (गढ़वाली में काना के रूप में जानी जाती है) और अंचल (एक प्रकार की नदी कार्प) प्रसिद्ध हैं। केकड़े, नदी सांप, ऊदबिलाव, पानी के पक्षी और पेरिविंकल्स भी देखे जा सकते हैं। आसपास के इलाके, नदियों की खोज और प्रकृति के स्थलों का आनंद लेने के अलावा, वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं है जो यहां किया जा सकता है। इसके अलावा, आसपास के पर्यटन स्थलों का दौरा किया जा सकता है। लैंसडाउन, जो शायद सबसे शांत, सबसे साफ और सबसे कम भीड़ वाला हिल-स्टेशन है, यहां से केवल 30 किलोमीटर दूर है। पहाड़ी रास्तों से घुमावदार होकर यह 1 घंटे का आनंददायक सफर है और जब आप सतपुली में 2200 फीट से लेकर लैंसडाउन में 6000 फीट की ऊंचाई पर चढ़ते हैं, तो आप जलवायु में भारी बदलाव महसूस कर सकते हैं। लैन्सडाउन को जंगल सफारी के लिए भी जाना जाता है। फिर भी, एक बात है जो अब तक की संख्या, अर्थात् मंदिरों में दूसरों से अधिक है। उत्तराखंड और पौड़ी जिले में मंदिरों की कोई कमी नहीं है।  ज्वाल्पा देवी मंदिर , भुवनेश्वरी देवी मंदिर (नायर और गंगा के संगम के पास), भैरव गढ़ी (7200 फीट की ऊंचाई पर मध्ययुगीन गढ़वाली किले और मंदिर) की यात्रा कर सकते हैं। सतपुली रामलीला, ग्रिश्मोत्सव, शरदोत्सव और कई उत्सवों का जश्न मनाता है, जो लोगों की भीड़ से मिलते हैं। ज्वाल्पा देवी मंदिर सतपुली का प्रसिद्ध मंदिर है जो पौड़ी की सड़क पर स्थित है जो सतपुली से लगभग 19.2 किमी दूर है।